*आज की कविता मेरे दोस्त के नाम याद करू उसे सुबह और शाम || *उसने हँसना सीखाया और रोने पर शांत कराया बाकियों ने तो मजाक उड़ाया || *उसने मुझे मैथ ( Math ) की कॉपी (Copy) दी बाकियों ने सर ( Sir) की गुलामी की || *उसने मेरे गलतियों पर मार खाया सच्चे दोस्त होने का एहसास दिलाया || *दोस्त तो बहुत मिल जाते है पैसे फेंकने पर ऐसा दोस्त नहीं मिलते लमतेन सी भी खोजने पर || By AslamAli.in
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